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मंत्रिमंडल विस्तार: जरूरत या समीकरण साधने का प्रयास

Cabinet expansion

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से लगाई जा रही अटकलों पर मंगलवार को उस वक्त विराम लग गया जब राजभवन में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ले ली। सीएम योगी के मुख्यमंत्रित्व के दूसरे कार्यकाल का ये पहला मंत्रिमंडल विस्तार है। इस कैबिनेट विस्तार में भाजपा के दो और एनडीए गठबंधन के दो नए चेहरों को शामिल किया गया है।

जी हां मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण में साहिबाबाद से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा और दारा सिंह को शपथ दिलाई गई है। वहीं राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के मुजफ्फरनगर के पुरकाजी के विधायक अनिल कुमार को और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) से ओम प्रकाश राजभर को मंत्री बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर 2017 वाले योगी मंत्रिमंडल में भी मंत्री थे लेकिन बाद में उन्होंने एनडीए से किनारा कर लिया। कहा जाता है कि राजभर और बाहुबली माफिया मुख़्तार अंसारी की अच्छी दोस्ती थी। मुख्तार का बेटा अब्बास अंसारी उनकी ही पार्टी से विधायक है।

ऐसे में जब सीएम योगी ने मुख़्तार अंसारी पर शिकंजा कसना शुरू किया तो राजभर ने इस पर ऐतराज जताया लेकिन योगी सरकार में उनकी एक नहीं चली। यही वजह थी कि राजभर ने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया और समाजवादी पार्टी से हाथ मिला लिया। और तो और साल 2022 के शुरुआती महीने में राजभर ने योगी आदित्यनाथ पर एक गंभीर आरोप भी लगा दिया। उन्होंने कहा कि सीएम योगी उनकी हत्या करना चाहते हैं। इसके बाद 2022 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अच्छा प्रदर्शन किया और राज्य की अधिकतर सीटों पर जीत हासिल की। वहीं अब बीजेपी 2024 ने अब लोकसभा चुनाव को लेकर भी तैयारियां तेज कर दी है।

उसने उत्तर प्रदेश में सारे समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। वह क्षेत्रीय और जातीय समीकरण तेजी से साध रही है, जिसका एक उदाहरण बीते दिन हुए योगी मंत्रिमंडल में देखने को मिला। बीजेपी ने जयंत चौधरी को अपने में मिला के पश्चिम में पार्टी को मजबूत करने का काम किया। उन्होंने उनकी पार्टी के एक विधायक को मंत्रिमंडल में जगह भी दी है। बता दें कि आरएलडी ने आगामी आम चुनाव के लिए बिजनौर और बागपत में अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है। मुज़फ़्फ़रनगर के मीरापुर से निवर्तमान विधायक चंदन चौहान बिजनौर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, जबकि आरएलडी के वरिष्ठ नेता डॉ. राजकुमार सांगवान बागपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

इस मंत्रिमंडल विस्तार में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को भी जगह दी गई है। राजभर के जरिए बीजेपी ने ओबीसी वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। हालांकि राजभर अभी पूर्वी यूपी की राजनीति के छोटे खिलाड़ी हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, उनकी छवि ओबीसी के लिए एक मुखर नेता के रूप में उभरी है। ये बात और है कि बार-बार दल बदलने की वजह से उनकी पिछड़ी जातियों की ‘सामाजिक न्याय’ की राजनीति भी कुछ कमजोर हुई है।

मंत्रिमंडल विस्तार में दारा सिंह चौहान को भी जगह दी गई है। वो भी सपा का साथ छोड़कर बीजेपी में वापस आये हैं। बता दें कि ये वही दारा सिंह चौहान हैं जो 14 जनवरी 2022 में बीजेपी को कोस रहे थे कि उसने कभी ओबीसी का भला नहीं किया। खैर ये राजनीति है, यहां देश और समाज का भला देखने से पहले अधिकतर नेता अपना ही भला देखते हैं। यहां कब कौन किसका दोस्त हो जायेगा और कौन किसका दुश्मन कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

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