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गृह मंत्री ने जारी किया CAA का नोटिफिकेशन, जानें नियम और प्रक्रिया

CAA

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस कानून के लागू होते ही कई दशकों से हक़ के लिए तरस रहे लोगों का सपना साकार हो जायेगा। अब बगैर दस्तावेज के भारत में रह रहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम लोगों को भारत का नागरिक बनने का गौरव मिल जायेगा। हालांकि कुछ लोगों को मानना है कि लोकसभा चुनाव से पहले सीएए इसलिए लागू किया गया है ताकि एक तीर से दो निशाने साधे जा सकें।

गौरतलब है कि दिसंबर, 2019 में ही सीएए संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया था और बाद में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन इसे लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसके चलते इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका था। ऐसे में 11 मार्च की शाम को सरकार ने इसे लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। सीएए लागू होने के बाद अब हर किसी के मन में सवाल है कि इससे देश में क्या-क्या बदलाव होंगे, तो आइये जानते क्या है सीएए और इससे किसे-किसे फायदा मिलेगा।

गत दिवस यानी 11 मार्च की शाम को गृहमंत्री अमित शाह ने सीएए से जुड़े 39 पन्ने का दस्तावेज जारी किया है, जिसमें नागरिकता लेने के कई फॉर्म हैं और हर फॉर्म का अपना एक विषय है।

ये हैं फार्म के प्रकार
  • भारत में विदेश से आए लोगों के लिए
  • भारत में विवाह करने वाले लोगों के लिए
  • नाबालिग बच्चे के लिए
  • भारतीय माता पिता के बच्चे
  • भारतीय मां या पिता के बच्चे के लिए
  • ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड होल्डर
  • भारत में आकर सिटिजन की तरह रहने वाले लोगों के लिए

दस्तावेज में 3 तरह के सर्टिफिकेट का भी जिक्र किया गया है।

  • सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन
  • सर्टिफिकेट ऑफ नेचुरलाइजेशन
  • योग्यता सर्टिफिकेट

अधिसूचना के मुताबिक CAA कानून में नागरिकता का आवेदन करने वाले को बताना होगा कि क्या उसने पहले कभी भारत की नागरिकता छोड़ी थी, क्या इससे पहले उसने कभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था या क्या पहले कभी उसका भारतीय नागरिकता से जुड़ा आवेदन रिजेक्ट हुआ था। नागरिकता की अर्जी देने वाले को ये भी बताना होगा कि वो भारत में स्थाई घर बनाकर रहेगा।

इन्हें मिलेगा फायदा
  • CAA लागू हो जाने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलेगी।
  • हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन पारसी ईसाई शरणार्थियों को ही भारत में वैध तरीके से रहने की अनुमति मिलेगी।
  • इस कानून की सबसे खास बात ये है कि जिन शरणार्थियों ने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया है, नागरिकता सिर्फ उन्हें ही दी जाएगी।
  • इस कानून के लागू होने से भारतीय नागरिकों के अधिकारों पर किसी भी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जानें आवेदन की प्रक्रिया
  • शरणार्थी आवेदकों को भारत की नागरिकता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
    भारत की नागरिकता के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
  • रजिस्ट्रेशन के बाद सरकार आवेदक की जांच पड़ताल करेगी और अगर सब कुछ नियम के मुताबिक ठीक रहा तो उसे भारत की नागरिकता दे दी जाएगी।

बता दें कि पहले भारत की नागरिकता लेने के लिए देश के 11 साल रहना अनिवार्य था लेकिन अब इस नए कानून में 6 साल तक भारत में रहने के बाद ही नागरिकता मिल जाएगी। इस कानून की सबसे ख़ास बात ये है कि यह विदेशियों को निकालने का कानून नहीं, बल्कि तीन देशों में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को सम्मानजनक जिंदगी देने वाला कानून है।

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Author: nyaay24news

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