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वकील के वेश में आये अपराधियों पर लखनऊ पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

लखनऊ

लखनऊ। वकील एक ऐसा ऐसा पेशा जो लोगों को न्याय दिलाता है, जब किसी शख्स की कहीं सुनवाई नहीं होती है, तो वह कोर्ट का रुख करता है, लेकिन इसके लिए उसे सबसे पहले जरूरत पड़ती है वकील की, क्योंकि वकील ही वह व्यक्ति होता है जिसके माध्यम से कोर्ट के सामने उसकी बात रखी जा सकती है। हालांकि अब कुछ तथाकथित वकील अपने निजी फायदे के चलते इस पेशे को बदनाम करने में जुट गए हैं। इसका एक जीता जागता उदाहरण लखनऊ में जानकीपुरम इलाके में देखने को मिला। यहां वकील के भेष में आये कुछ युवकों एक घर में रह रहे लोगों को जबरन निकाल दिया और उस पर कब्जा कर लिया। इस संबंध में पीड़ित ने मड़ियांव थाने में मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई तो उसने जेसीपी की शरण ली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां मड़ियांव गांव के रहने वाले अमन श्रीवास्तव ने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में बताया है कि उनके पिता राम प्रताप ने 15 जनवरी, 2022 को ज्ञानवती का दो हजार वर्ग फीट भूखण्ड का बैनामा कराया था जिस पर वह मकान बना कर रह रहे थे। इस भूखंड का बिजली का कनेक्शन, नगर निगम हाऊस टैक्स भी पिता के नाम पर आता है। अमन ने बताया कि 21 अप्रैल, 2023 को श्यामलाल, दिनेश, श्यामा, सावित्री, देवांश मौर्या समेत कई लोगों ने वकील के वेश में उनके घर पर धावा बोल दिया और जबरन घर खाली करने को कहा। साथ ही ये भी कहा कि घर चाहिए, तो पैसे दो, उन लोगों ने घर छोड़ने के बदले लाखों रूपये की रंगदारी मांगी।

अमन द्वारा पुलिस को दी गई एफआईआर में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि उनके पड़ोस में रहने वाले आमिर खान, कामिल खान, शारदा रस्तोगी और दीपमाला के घर पर भी कुछ लोगों ने कब्जे की कोशिश की। 28 अप्रैल और एक मई को आसपास के कुछ मकानों का ताला तोड़कर कब्जा कर लिया गया। जब इस मामले में पुलिस को सूचित किया गया वह आई और बिना कोई कार्रवाई किये वापस लौट गई। पीड़ित का कहना है कि वकीलों के वेश में आए प्रिंस सिंह, प्रशांत मिश्र, समीर वर्मा, धर्मेन्द्र वर्मा, देवांश मौर्य, श्याम लाल, दिनेश, श्यामा, सावित्री और अन्य ने कब्जा छोड़ने के बदले उन सभी से 10-10 लाख रुपये मांगे।

पीड़ितों का आरोप है कि कई बार शिकायती पत्र दिए जाने के बाद जब मड़ियांव थाने से उन्हें राहत नहीं मिली और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो उन्होंने जेसीपी उपेन्द्र अग्रवाल के बनाए विशेष प्रकोष्ठ में प्रार्थना पत्र दिया और अपनी दास्तां सुनाई। इसके बाद जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि आरोपितों ने कोर्ट में गलत तथ्य दिखाकर पीड़ित के पिता राम प्रताप श्रीवास्तव को किरायेदार दिखा दिया, जबकि वह मालिक थे। प्रकोष्ठ की जांच के बाद सभी आरोपियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया, जिसके बाद जानकीपुरम थाने ने गुरुवार को 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दो साल में आरोपितों ने उनके यहां जमकर बवाल काटा और मारपीट की। वहीं अब जेसीपी ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

वकील बन कर मांगी रंगदारी

मड़ियांव कोतवाली इलाके में वकीलों की दबंगई का एक और मामला सामने आया है। यहां हिम सिटी गेट पर कुछ लोगों ने खुद को वकील बताकर एक युवक से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी और मना करने पर उसे पिस्टल बट, रॉड से इतना पीटा कि वह लहूलुहान हो गया। पीड़ित की शिकायत पर मड़ियांव थाने में हमलावरों पर केस पंजीकृत कर लिया गया है। इसमें चार लोग नामजद और अन्य अज्ञात दिखाए गए हैं। घटना के बारे में बताते हुए हिम सिटी कॉलोनी में रहने वाले देवाशीष बाजपेयी उज्जवल ने कहा कि वह 13 मार्च को हिम सिटी गेट पर सामान लेने गए थे। वहां रघुराजन प्रताप सिंह, सक्षम सक्सेना, अंकुर चौधरी, अभिषेक प्रताप सिंह और चार अन्य फॉर्च्यूनर से आए। वे कुछ समझ पाते इससे पहले ही उन लोगों ने उसे घसीट लिया और सौरभ सिंह व सौरभ वर्मा ने पांच लाख रंगदारी देने की बात कही। जब देवाशीष ने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने पिस्टल लगा दी। शोर मचाने पर बट, रॉड से पिटाई कर दी। शोर सुनकर जब कुछ लोग मदद के लिए आने लगे तो हमलावर फरार हो गये।

आपको बता दें कि वकीलों के वेश में दबंगई, मारपीट और कब्जेदारी का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तथाकथित वकीलों ने अपराधों को अंजाम दिया है। बीते सात जून 2023 को लखनऊ के ही वजीरगंज थाना क्षेत्र में मुख्तार अंसारी के करीबी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में भी कातिल वकील के वेश में ही आये थे। उन्होंने कचहरी में घुसकर वारदात को अंजाम दिया है।

उल्लेखनीय है कि बीते साल अगस्त महीने में यूपी के कानपुर जिले में अपराध को लेकर एक गोपनीय जांच कराई गई थी जिसमें 312 ऐसे लोग पाए गए हैं, जो पुलिस, पत्रकार और वकील के वेश में अपराध करते हैं। इनमें से कई ऐसे लोग हैं जिन पर आधा दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं।  इन्हें  ‘जमीनों पर कब्जा, अपराधियों को संरक्षण और अपराधों में लिप्त’ बताया गया हैं।

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