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तीसरी बार सत्ता में आने की जुगत में बीजेपी, सपा ने भी कसी कमर

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  • बीजेपी से राजनाथ सिंह तीसरी बार मैदान में

  • सपा ने रविदास मेहरोत्रा पर जताया भरोसा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ राजनीति की दृष्टि से हमेशा से अहम रहा है। इस सीट से आजादी के बाद पहली बार जवाहर लाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने 1951 में चुनाव लड़ा। लखनऊ को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की तपस्थली के तौर पर भी जाना जाता है। ये सीट लालजी टेंडन की रणभूमि थी। वर्तमान समय में इस सीट से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सासंद हैं।

पिछले आठ चुनाव से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने जब से सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, तबसे वे लगातार पांच बार लखनऊ से जीत कर संसद पहुंचे थे। अटल के बाद उनकी विरासत को लालजी टंडन ने आगे बढ़ाया। टंडन पर भी लखनऊ की जनता ने जमकर प्यार बरसाया। पिछले दो चुनाव से राजनाथ सिंह लोकसभा में लखनऊ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब एक बार फिर से भाजपा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चुनाव मैदान में उतार है। वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन ने लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा को टिकट दिया है, लेकिन बसपा अभी इस सीट पर अभी चुप्पी साधे  हुए हैं। सत्ताधारी दल यानी भाजपा लखनऊ से ट्रिपल हैट्रिक लगाने यानी 9वीं बार जीत की जुगत में है। वहीं सपा कड़े मुकाबले की तैयारी में है। दोनों दलों का अपना वोट बैंक हैं।

संसदीय क्षेत्र के अब तक के नतीजे बताते हैं कि आजादी के बाद ज्यादातर चुनाव कांग्रेस और भाजपा के बीच हुए। इस सीट पर पहले कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन समय बीता तो लखनऊ की जनता की सोच भी बदली। साल 1989 में जनता दल की लहर में कांग्रेस का ये किला ढह गया तो कभी खड़ा नहीं हो पाया। वर्ष 1991 के बाद 33 वर्ष से लगातार इस सीट से बीजेपी जीत रही है। जनता दल के बाद अटल बिहारी बाजपेयी 1996 में पहली बार इस सीट से चुनाव मैदान में और जीत दर्ज की।  दो चुनाव तक तो  सपा मुकाबले में थी लेकिन 1999 में कांग्रेस मुकाबले में आ गई, लेकिन कभी भी कोई भी पार्टी भाजपा को शिकस्त नहीं दे पाई।

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2004 में सपा यहां से दूसरे नंबर पर थी लेकिन 2009 और 2014 में चुनाव में चौथे नंबर पर पहुँच गईं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस से डॉक्टर रीता बहुगुणा जोशी मुख्य मुकाबले में रही। 2019 में सपा ने फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सि न्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को टिकट दिया लेकिन वह भी जनता का भरोसा नहीं जीत सकी। पूनम सिन्हा 25 %वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहीं। अब 2024 के चुनाव में सपा ने रविदास मेहरोत्रा पर भरोसा जताया है। रविदास खांटी लखनवी है और हर गली मोहल्ले से वाकिफ हैं। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी किसी पहचान के मोहताज नहीं है।

प्रवक्ता से राजनेता तक का सफर

केबी कॉलेज मिर्जापुर से भौतिकी के प्रवक्ता रहे राजनाथ 1974 और 1977 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद 1991 में वह यूपी के शिक्षामंत्री और अक्टूबर 2000 में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली और सीएम बने। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल चुके राजनाथ 2009 में गाजियाबाद और 2014 और 2019 में लखनऊ से सांसद चुने जा चुके हैं। केंद्रीय भूतल, परिवहन मंत्री, कृषि मंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके राजनाथ सिंह वर्तमान में केंद्रीय रक्षा मंत्री का पद संभाल रहे हैं। राजनाथ सिंह राजनीति के दिग्गज नेता हैं और उनकी अपनी एक शैली है।

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