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आधी आबादी को है महिला नेतृत्व पर भरोसा

आधी आबादी

जब अधिकारों के साथ-साथ पहचान की बात आती है तो महिलाओं की ताकत नजर आने लगती है। महिलाएं अपनी कार्यशैली और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में परचम फहरा  रही हैं। वे अब घर की चहारदीवारी में ही कैद नहीं बल्कि आसमान नाप रही हैं। तमाम संघर्षों और बंधनों से खुद को आजाद करते हुए देश दुनिया की ये आधी आबादी अब पूरे पंख फैला कर  उड़ रही है और खुद को साबित कर रही है। राजनीति में भी महिलाओं ने जबरदस्त दस्तक दी है।

आधी आबादी लोकतंत्र की वह शक्ति है जो अब जाग चुकी है, जिससे न सिर्फ वर्जनाएं टूट रही हैं बल्कि पुराने समीकरण भी ध्वस्त हो रहे हैं।  लोकतंत्र की ये शक्ति नित नए अध्याय रच रही हैऔर फिर सफलता के शीर्ष तक पहुंच रही हैं। 2019 के चुनाव में भी कुछ ऐसा ही दिखा था, जहां महिलाओं ने खुद को साबित किया है। अवध की जिस सीट पर महिला प्रत्याशी मैदान में थीं, वहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत सर्वाधिक रहा। ऐसे में महिला प्रत्याशियों को जीत भी मिली।

अवध की प्रमुख महिला नेताओं की जीत में मानसिक समानता और परिस्थितियों के अलावा महिला मतदाताओं के मूड ने भी अहम भूमिका निभाई। चाहे वह 2019 में रायबरेली से सोनिया गांधी हों, अमेठी से स्मृति ईरानी हों या फिर सुल्तानपुर से मेनका गांधी। इन तीनों के चुनावी मैदान में उतरते ही महिला मतदाताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया और  उनकी जीत पक्की कर दी। इन सीटों पर महिला वोटर पुरुषों से पहले मतदान बूथ पर पहुंचीं और जितना संभव हो सका उतना वोट दिया। वहीं महिला प्रत्याशी भी अपनी जनता जनार्दन का हालचाल लेने के लिए उनके बीच पुरुष प्रत्याशियों से पहले पहुंचीं। इन महिला नेताओं को उनकी मेहनत का फल भी मिला और वे संसद पहुंचीं। इस बार के चुनाव में भी महिलाओं के वोट निर्णायक हो सकते हैं। युवाओं की सोच और चेतना भी इसी पर निर्भर करेगी।

2019 के लोकसभा चुनावों में तीन पश्चिमी निर्वाचन क्षेत्रों ने राज्य में महिलाओं का उच्चतम प्रतिशत हासिल हुआ था। इसमें अमरोहा प्रथम स्थान पर रहा। यहां 71.55 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सहारनपुर की महिलाएं 69.92 प्रतिशत के साथ दूसरे और मुजफ्फरपुर की महिलाएं 68.14 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इतिहास जागरूकता एवं तुलना का एक उपकरण है,  लेकिन अगर अवध की बात करें तो यहां  का रिकॉर्ड एकदम अनोखा रहा। इधर, जिन जगहों पर मजबूत महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, वहां महिला मतदाता भी उन्हें वोट देने के लिए घर की दहलीज लांघकर मतदान केंद्रों पर पहुंचीं।

सोनिया गांधी: रायबरेली में जमकर बरसे महिला वोट

जब कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ीं, तो जिले की महिलाओं ने मतदान में बढ़चढ़ कर  हिस्सा लिया। नतीजा ये रहा कि सोनिया गांधी ने भारी अंतर से चुनाव जीता।  लोकतंत्र के इस महापर्व में महिलाओं की भागीदारी 58.12 प्रतिशत रही जबकि पुरुषों की भागीदारी 54.33 प्रतिशत रही।

स्मृति ईरानी: अमेठी में 56.37% वोटों के साथ आगे रहीं महिलाएं 

अमेठी जिले का भी यही हाल रहा। देश की सबसे प्रतिष्ठित सीट मानी जाने वाली इस सीट से बीजेपी के टिकट पर स्मृति ईरानी ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यहां उनका मुकाबला गया सोनिया गांधी के इकलौते बेटे और अमेठी से सांसद रहे राहुल गांधी से था। इस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने पूरा जोर लगा दिया था। दरअसल, राहुल के लिए ये सीट उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ी थी। वहीं भाजपा यहां  जीत से कम पर तैयार नहीं थी।आखिर कार स्मृति ने राहुल  को हरा दिया। 2019 के चुनाव में 56.37% के साथ महिलायें आगे रहीं। उन्होंने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया और गांधी परिवार को पांच साल के लिए अमेठी की राजनीति से बाहर कर दिया।

मेनका गांधी: 59 फीसदी वोटों के साथ दर्ज की जीत

201 9 के चुनाव में सुल्तानपुर सीट से मेनका गांधी मैदान में थी। उन्होंने बसपा के चंद्र भद्र सिंह को  हराया था। हालांकि किसी को उम्मीद नहीं थी वे चंद्र भद्र  को हरा पायेंगी। राजनीतिक कयासों और समीकरणों के प्रमाण के विशेषज्ञ भी मतदाताओं का मूड भांपने में उस वक्त असमर्थ रहे थे। मेनका की मार्मिक अपील के लिए महिलाओं ने सबसे ज्यादा 59.09 प्रतिशत वोट किए। यहां 53.72% के साथ पुरुष भी पीछे हैं और मेनका इस क्षेत्र की पहली महिला सांसद चुनी गईं।

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Author: nyaay24news

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