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वोट कटवा साबित हो सकते हैं ओवैसी और पल्लवी?

ओवैसी
  • पीडीए और पीडीएम की लड़ाई में नफा-नुकसान का गुणा भाग बैठाने में जुटे सियासी पंडित 

लखनऊ। अपना दल कमेरवादी की पल्लवी पटेल और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी का पिछड़ा-दलित-मुस्लिम (पीडीएम) न्याय मोर्चा लोकसभा चुनाव में क्या गुल खिलाएगा। अब ये सवाल सियासी पंडितों के मन में भी उठने लगे हैं लेकिन जिस तरह से ओवैसी समाजवादी पार्टी पर लगातार मुस्लिमों का शोषण करने और सिर्फ वोट हासिल करने की राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं, उससे साफ है कि सबसे बड़ी चुनौती वह अखिलेश यादव के सामने ही खड़ी करेंगे।

इस लोकसभा चुनाव में ओवैसी फैक्टर इसलिए भी अहम है, क्योंकि सपा के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) का मुकाबला अब पीडीएम से होगा। अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने भी सपा से राहें जुदा कर ली हैं। वह, पीडीए की अनदेखी का आरोप लगाते हुए लगातार सपा पर हमलावर रही हैं। वहीं, ऑल इंडिया मजलिस- ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी सपा पर मुस्लिमों के शोषण का आरोप लगाते रहे हैं।

मुस्लिम मतदाताओं के बीच एआईएमआईएम की पैठ लगातार बढ़ रही है। यह वजह है कि अखिलेश यादव ओवैसी को बीजेपी की बी टीम बताकर मुस्लिमों के बीच उनके असर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। 2017 का विधानसभा चुनाव एआईएमआईएम  के लिए प्रदेश में पहला चुनाव था। पार्टी ने प्रदेश की 38  सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। सभी सीटों को मिलाकर उसे करीब 2 लाख वोट मिले। संभल सीट पर ओवैसी की पार्टी को सबसे अधिक 60 हजार वोट मिले थे। वहीं तीन सीटें ऐसी भी थीं जहां पर एआईएमआईएम को 10 हजार से अधिक वोट मिले थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम को प्रदेश में करीब 4.5 लाख वोट मिले। उस वक्त पार्टी ने  95 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन एक पर भी उस जीत हासिल नहीं हुई थी।  कई सीटों पर उसने 10 हजार से अधिक वोट हासिल किए।

7 सीटों पर प्रभावित हुआ था सपा का वोट बैंक

उत्तर प्रदेश में ओवैसी की सियासी ताकत के विस्तार की रफ्तार भले धीमी हो लेकिन उनकी वजह से सपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में 7 सीटों पर नुकसान झेलना पड़ा था। इन सीटों पर सपा के प्रत्याशियों को 217 से लेकर 1647 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। यही नहीं पिछले साल हुए निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 17 में से 9 नगर निगमों में मेयर के प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि पार्टी को कहीं भी जीत नहीं मिली थी लेकिन उसने मेरठ में बड़ा उलटफेर तो कर दिया था। यहां जीत की स्थिति में रही सपा को तीसरे नंबर पर धकेलते हुए खुद दूसरे नंबर पर खड़ी हो गई थी।

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