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कोविशील्ड के साइड इफेक्ट पर बोले एक्सपर्ट, घबराएं नहीं- बेहद रेयर है ब्लड क्लॉटिंग की समस्या

कोविशील्ड

लखनऊ। कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड को लेकर उस वक्त मामला गरमा गया जब कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में स्वीकार किया कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी वायरल होने लगा कि कोविशील्ड वैक्सीन लोगों में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) की वजह बन रही है। इस बीमारी में खून के थक्के जमने की समस्या हो रही है। हालांकि इस मामले में डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसा रेयर है। विशेषज्ञों की मानें तो उन्हें इस वैक्सीन के केवल हल्के दुष्प्रभाव ही अभी तक देखने को मिले हैं, लेकिन पोस्ट कोविड साइड इफेक्ट ज्यादा हैं। ऐसे में अगर किसी को दिक्कत हुई तो जरूरी नहीं कि वह वैक्सीन की वजह से हुई है।

माइल्ड साइड इफेक्ट हो सकते हैं

डॉक्टर्स की मानें तो कोविड के दौरान भी साइड इफेक्ट पर शोध भी किया था जिसे वर्ल्ड जनरल ऑफ कार्डियॉलजी में प्रकाशित भी किया गया था। उस शोध में बताया गया था कि कोविड वैक्सीन से माइल्ड साइड इफेक्ट हो सकते हैं लेकिन टीटीएस जैसी गंभीर समस्या होने की संभावना न के बराबर है। उस वक्त किए गए अध्ययन में एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया था जिसमें खून के थक्के जमने की समस्या देखने को मिली हो। चूंकि कोविड होने के बाद लोगों को दिक्कत आ रही थी, ऐसे में साइडइ फेक्ट हो सकते हैं, वो भी बहुत रेयर।

अभी तक सामने नहीं आये हैं गंभीर साइड इफेक्ट

केजीएमयू के डॉक्टर्स की मानें तो कोविड वैक्सीन से गंभीर साइडइफेक्ट सीधे तौर पर अभी तक सामने नहीं आए हैं। आईसीएमआर के भारत में किए गए शोध में भी इस तरह की बात सामने नहीं आई है। ऐसे में किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में अब तक कुल 95 लाख डोज कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जिसमें 72 लाख लोगों ने कोविशील्ड लगवाई है जबकि कुल 45 लाख लोगों ने दोनों डोज लगवाई हैं। वहीं महज 9.6 लाख लोगों ने तीसरी यानी बूस्टर डोज भी लगवाई है।

कंपनी ने कोर्ट में स्वीकारी साइड इफेक्ट की बात

गौरतलब है कि ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने बीते दिन कोर्ट में इस बात को स्वीकार किया था कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड से साइड इफेक्ट हो सकते हैं। लंदन स्थित अखबार टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने ब्रिटिश हाई कोर्ट में दिए अपने एक बयान में कहा कि बहुत रेयर मामलों में वैक्सीन से खून के थक्के बन रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन विकसित की है। एस्ट्राजेनेका के ही फार्मूले से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने कोविशील्ड नाम से वैक्सीन का निर्माण किया था।

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