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बीजेपी के लिए चुनौती बनी ब्राह्मणों की नाराजगी

BJP

बांदा। बांदा लोकसभा क्षेत्र में सियासी पारा चरम पर है। ऋषि वामदेव की धरती पर कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा और वामदल भी अपना परचम लहराया चुके हैं। केन और यमुना नदियों के बीच स्थित इस इलाके में अगड़ी और पिछड़ी जातियों के मत बेहद अहम हैं। यही वजह है कि अब तक सात ब्राह्मण उम्मीदवार और पांच बार पटेल समुदाय के प्रत्याशी को जीत मिली है। इस बार भाजपा और सपा दोनों ने पटेल समुदाय पर दांव लगाया है जबकि बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। बीजेपी से ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी ने सियासी समीकरण को न सिर्फ दिलचस्प बनाया है बल्कि त्रिकोणीय भी बना दिया है। ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी भी बीजेपी के लिए असली चुनौती है। फतेहपुर के रास्ते बांदा लोकसभा क्षेत्र में प्रवेश करते ही यहां बदलाव साफ नजर आता है।

आरके पटेल

बीजेपी ने इस सीट से चित्रकूट के रहने वाले आरके पटेल को टिकट दिया है। वह 2009 में सपा के टिकट पर सांसद बने थे। इसके बाद 2014 में बसपा में शामिल हो गए और फिर भाजपा में आए। भाजपा के वोट के साथ बिरादरी का सहारा ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने की चुनौती है।

गठबंधन से लाभ मिल सकता है

कृष्णा पटेल

सपा प्रत्याशी कृष्णा पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष थीं। उनके पति शिव शंकर सिंह पटेल बीजेपी सरकार में मंत्री थे। इसके अलावा सपा के वोटों के अलावा पटेल समाज के वोटों को भी साधने का काम है।

ब्राह्मणों को अपने पक्ष में रखने की चुनौती

मयंक द्विवेदी

बसपा प्रत्याशी मयंक द्विवेदी के पिता पुरूषोत्तम नरेश द्विवेदी नारायणी से विधायक हैं। मयंक युवा चेहरा हैं और जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्हें ब्राह्मण और दलित मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है। उम्मीद है कि ब्राह्मण वोटरों का साथ मिला तो यहां नतीजे बदल सकते हैं।

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Author: nyaay24news

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