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कुशीनगर: स्वामी प्रसाद के खिलाफ बेटे ने कि बगावत ! जानें क्या है वजह ?

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर लोकसभा सीट इस समय सियासी मुकाबला और भी ज्यादा रोमांचक हो गया है। जहां एक कैंडिडेट के खिलाफ उसके बेटे ने ही चुनाव मैदान में अब ताल ठोंक दी है। और वो कोई नहीं बल्कि राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कुशीनगर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। इसके बाद उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। 14 मई तक चली नामांकन प्रक्रिया के बाद 15 मई को नामांकन पत्रों की जांच हुई। इसमें स्वामी प्रसाद मौर्य और उत्कृष्ट मौर्य के नामांकन पत्र सही पाए गए। हालांकि, अब बाप-बेटे की सियासी लड़ाई में नया मोड़ आता दिख रहा है। सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।

बेटे के नामांकन में भी नहीं दिखें थे स्वामी

स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले दिनों सनातन धर्म, रामचरितमानस, ब्राह्मण और साधु-संतों पर लगातार विवादित बयान देकर सुर्खियों में रहे। उन्होंने यूपी चुनाव 2022 से पहले भाजपा छोड़ समाजवादी पार्टी का दामन थामा। समाजवादी पार्टी में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। वे यूपी विधान परिषद के सदस्य बनाए गए। लेकिन, अखिलेश के साथ उनकी नहीं बन पाई। उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी बना ली। अब उन्होंने कुशीनगर से चुनावी मैदान में उतर कर अन्य उम्मीदवारों के लिए खतरा बना दिया है। बेटे ने भी उनके खिलाफ नामांकन किया।

उत्कृष्ट मौर्य के नामांकन के समय स्वामी प्रसाद मौर्य मौजूद नहीं थे। उत्कृष्ट ने मंगलवार को कुशीनगर कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपने पिता के खिलाफ नामांकन पत्र भरा था। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना नामांकन 9 मई को अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर दाखिल किया। बेटे के नामांकन में नहीं शामिल होने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पारीवारिक विवाद की वजह से यह मामला सामने आया। अब इसके बाद अलग सूचना सामने आ रही है।

बेटे को सफल लॉन्च नहीं करा पाए स्वामी

स्वामी प्रसाद मौर्या अपने बेटे उत्कृष्ट को राजनीति में सफल एंट्री कराने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से भाजपा के टिकट पर निवर्तमान सांसद हैं। हालांकि, बेटा उत्कृष्ट अब तक कोई भी चुनाव जीत पाने में कामयाब नहीं हो पाया है। उत्कृष्ट को दो बार ऊंचाहार सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ाया जा चुका है। हालांकि, उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान सपा में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बेटे के लिए ऊंचाहर सीट से टिकट की मांग की थी। अखिलेश यादव ने उनकी मांग ठुकरा दी थी। इसी के बाद से स्वामी प्रसाद मौर्य की नाराजगी बढ़ी हुई थी।

भाजपा को भी वोट बैंक खिसकने का डर

स्वामी प्रसाद मौर्य के चुनावी मैदान में उतरने से भारतीय जनता पार्टी को भी वोट बैंक खिसकने का खतरा बढ़ा हुआ है। कुशीनगर लोकसभा सीट पर तमाम उम्मीदवारों के बीच खलबली मची है। इस सीट पर भाजपा के टिकट पर उतरे विजय दुबे लगातार दूसरी बार जीत का गणित बना रहे हैं। हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य के आने से ओबीसी और दलित वोट बैंक में बंटवारे का खतरा पैदा हो सकता है। स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से कुशीनगर में सक्रिय रहे हैं। इस कारण वे वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ इसी प्रकार का खतरा विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को भी है। हालांकि, पिता-पुत्र के चुनावी मैदान में उतरने पर उनके समर्थकों के बीच अलग माहौल बन सकता है।

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